शिक्षा मानव जीवन को समृद्धि प्रदान करने का एक सशक्त साधन है। यह एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से एक बालक आगे चलकर समाज का कुशल नागरिक बनता है। समाज में विशिष्ट स्थान प्राप्त करने के लिए उच्च शिक्षा की आवश्यकता होती है, जो शिक्षार्थी में पूर्ण मानवीय गुणों एवं उदात्तता को परिपूर्ण करती है।
उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास तक सीमित न होकर व्यक्ति में अन्तर्निहित रचनात्मकता एवं मानवीयता को विकसित करना भी है। यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक गुणों का विकास कर उसे उसकी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती है।
देश एवं समाज के सर्वांगीण विकास हेतु छात्र-छात्राओं को केवल शिक्षित करना पर्याप्त नहीं, आधुनिक परिवेश में उन्हें ज्ञान-विज्ञान की समुचित शिक्षा से अलंकृत करना आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर सहतवार की धरती पर महाविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया गया।
आज यह महाविद्यालय अपने शैक्षिक तथा शिक्षणेत्तर क्रिया-कलापों के माध्यम से जनपद में ही नहीं, विश्वविद्यालय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में सफल है। आशा है कि विकास के पथ पर अग्रसर रहते हुए यह महाविद्यालय इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को सार्थक शिक्षा सुलभ कराता रहेगा।


जिनके संकल्प से यह महाविद्यालय खड़ा है




